बॉलीवुड एक्टर राहुल शर्मा और साउथ व भोजपुरी फिल्मों की एक्ट्रेस मेघा श्री स्टारर बहुप्रतीक्षित भोजपुरी फिल्म ‘मांग भरो सजना’ आगामी 14 नवंबर से सिनेमाघरों में दस्तक देने जा रही है। वहीं इस फिल्म का रोमांटिक गाना ‘पातर कमरिया’ डीआरजे रिकॉर्ड्स भोजपुरी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है। इस रोमांटिक गीत को विजय चौहान और शिल्पी राज ने मधुर स्वर में गाया है। इस सांग को संगीतकार साजन मिश्रा ने गीतकार आशुतोष तिवारी के लिखे गीतों को मधुर संगीत सजाया है।
बता दें कि भोजपुरी आइकॉन अक्षरा सिंह के साथ सुपरहिट भोजपुरी फिल्म ‘डार्लिंग’ देकर राहुल शर्मा दर्शकों पर अमिट छाप छोड़ चुके हैं। डार्लिंग के बाद नये एक्शन अवतार में राहुल शर्मा एक बार फिर अपने अभिनय का जौहर दिखाने वाले हैं। बाबा मोशन पिक्चर्स के बैनर तले बनी राहुल शर्मा और मेघाश्री के शानदार अभिनय से सजी भोजपुरी फिल्म ‘मांग भरो सजना’ को पूरे भारत के सिनेमाघरो में फिल्म वितरक कंपनी प्रांशुल मैजिक मोमेंट रिलीज कर रही है। इस फिल्म का ट्रेलर पहले ही डीआरजे रिकॉर्ड्स भोजपुरी के यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया जा चुका है। इस फ़िल्म के ट्रेलर में राहुल शर्मा का खतरनाक एक्शन देखकर लोग आश्चर्यचकित हो रहे हैं। उनकी एक्टिंग, लुक और एक्शन देखकर फ़िल्मी गलियारों में चर्चा जोर शोर से होने लगी है कि राहुल शर्मा के रूप में भोजपुरी फिल्म इंडस्ट्री को साउथ के हीरो जैसा दमदार एक्टर मिल गया है।
गौरतलब है कि निर्माता प्रदीप के. शर्मा और सह-निर्मात्री अनीता शर्मा द्वारा भव्य पैमाने पर निर्मित की गई भोजपुरी फिल्म ‘मांग भरो सजना’ के निर्देशक राकेश त्रिपाठी हैं। इस फ़िल्म की बहुत ही जबरदस्त कहानी है, जिसमें परिवारिक ड्रामा के साथ एक्शन, रोमांस और रोमांच भरपूर डोज देखने को मिल रहा है। फिल्म के मुख्य कलाकार राहुल शर्मा, मेघाश्री, कुणाल सिंह, देव सिंह, रोहित सिंह मटरू, विनीत विशाल, मोना राय, कादिर शेख, आयुषी यादव, प्रकाश जैस, संभू राना, रवि तिवारी, रवि शेखर सिन्हा, के. के. गोस्वामी, संजना वर्मा, डॉली गुप्ता, सशि मिश्रा, पूजा हैं। इस फ़िल्म की कथा, पटकथा व संवाद राकेश त्रिपाठी ने लिखा है। छायांकन महेश वेंकट ने किया है। गीतकार आशुतोष तिवारी, शेख मधुर, धरम हिंदुस्तानी लिखे गीतों को संगीतकार साजन मिश्रा ने मधुर संगीत से सजाया है। सिंगर विजय चौहान, शिल्पी राज, साजन मिश्रा, सुगम सिंह, संध्या सरगम, ज्योति शर्मा हैं। कला विजय श्रीवास्तव, मारधाड़ दिलीप यादव, बैकग्राउंड म्यूजिक बी.एम.वी., नृत्य रिक्की गुप्ता, संकलन कोमल वर्मा, वेशभूषा बादशाह खान का है। पब्लिसिटी डिजाइनर नरसू, पीआरओ रामचन्द्र यादव हैं। विजुअल प्रमोशन विकास पवार, कलरिस्ट हेमंत थापा, पोस्ट प्रोडक्शन लैब ऑडियो लैब, मिक्सिंग इंजीनियर धीरज पुजारी (मुन्ना), वीएफएक्स रितेश दफ्तरी, सह-निर्देशक रवि तिवारी, सहायक निर्देशक कुलदीप मिश्रा, सोनू, एक्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर & प्रोजेक्ट हेड गौरव पटेल, प्रोडक्शन मैनेजर ऋषि श्रीवास्तव, लाइन प्रोड्यूसर (लखनऊ) रिजवान खान (प्रिज्म प्रोडक्शन) हैं।


राहुल शर्मा, मेघा श्री की ‘मांग भरो सजना’ का गाना ‘पातर कमरिया’ विजय चौहान और शिल्पी राज की आवाज में रिलीज
लोक आस्था का महापर्व छठ पूजा और छठ माता की महिमा पर आधारित फिल्म ‘जय हो छठी माँ’ नुक्कड़ आइडिया प्रोडक्शन एलएलपी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज होते ही ये फ़िल्म वायरल हो गई है। इस फिल्म ने मात्र एक दिन में ही डेढ़ मिलियन व्यूज और 2 मिनट दिन के अंदर ही दो मिलियन से अधिक व्यूज यूट्यूब पर पार कर लिया है। फिल्म निर्मात्री मधु शर्मा, रिंकू घोष और विद्या मौर्य द्वारा निर्मित की गई है इस फिल्म का निर्माण बड़ी शिद्दत से किया गया है। इस फिल्म के निर्देशन की कमान चिराग दत्त ने संभाला है। यह पूरी फिल्म छठ माता की अपरंपार महिमा से ओत प्रोत है। इस फिल्म में छठ माता के प्रति आस्था, श्रद्धा और विश्वास दिखाया गया है। मुख्य कलाकार रिंकू घोष, मधु शर्मा, अंजलि चौहान, विष्णु मौर्य, विमल पांडेय, जे. नीलम, प्रिया वर्मा, संजय वर्मा, संजू सोलंकी, जनार्दन पांडे, पूजा मिश्रा, राजकुमार मद्धेशिया, अमित दत्त, डॉली श्रीवास्तव, इंद्रेश त्रिपाठी, अजय मिशेल, रितेश मौर्य हैं।
उल्लेखनीय है कि नुक्कड़ आइडिया प्रोडक्शन एलएलपी प्रस्तुत लट्टू मूवीज वर्ल्ड एलएलपी के सहयोग से बनी फिल्म ‘जय हो छठी माँ’ को यूट्यूब पर बेपनाह प्यार मिल रहा है। दिग्गज अभिनेता अवधेश मिश्रा को विशेष धन्यवाद दिया गया है। इस फिल्म की निर्मात्री मधु शर्मा, रिंकू घोष और विद्या मौर्य हैं। निर्देशक चिराग दत्त हैं। लेखक दिलशाद शामली हैं। पटकथा व संवाद चिराग दत्त और दिलशाद शामली ने लिखा है। सह-निर्माता जनार्दन पांडे (बबलू पांडे), प्रोडक्शन मैनेजर राजेंद्र मौर्य, कार्यकारी निर्माता (ईपी) विनोद मौर्य, डी.ओ.पी. राहुल चौधरी, कला निर्देशक नागेंद्र गुप्ता, मेकअप मैन समसुद्दीन (सैम), हेयर ड्रेसर वर्षा, कॉस्ट्यूम डिजाईनर विद्या मौर्य (नानू फैशन डिजाइनर), एडीटर प्रवीण एस राय, सहायक एडीटर अंबरीश मौर्य व आकाश राजभर, प्रोमो एडीटर प्रवीण एस राय हैं। डी.आई. नरेंद्र पाल, डी.आई. कंफर्मिस्ट दिनेश राजभर, वीएफएक्स इंदर यादव ने किया है।
सिंगर प्रियंका सिंह, अलका झा, ममता राउत, और भरत बागी, संगीतकार शिवपाल सरगम, गीतकार मनीष प्रजापति और भरत बागी हैं। रिकॉर्डिंग और मिक्सिंग मंत्रा स्टूडियो प्रेम रवि सागर, बीजीएम मनोज सिंह, एसएफएक्स,फोले व मिक्सिंग राजीव राय ने किया है। पीआरओ रामचन्द्र यादव हैं।
अभिनेता विष्णु मौर्य ने कहा, ‘हमारी फिल्म ‘जय हो छठी माँ’ केवल एक फिल्म नहीं है, बल्कि हम सभी के दिल की भावना है। यह हमारी आस्था, पहचान और मूल जड़ों से जुड़ाव की कहानी है। इस फिल्म के जरिए हम यह चाहते हैं कि दुनियां के लोगों को हमारी संस्कृति, सादगी और शक्ति की जानकारी मिल पाये। हमें और हमारी पूरी टीम को इस बात की बहुत खुशी है कि हमारी फिल्म हर वर्ग के दर्शकों तक पहुंचा रही है। अपना प्यार आशीर्वाद देने के लिए सभी को दिल से धन्यवाद देता हूँ।’


मधु शर्मा, रिंकू घोष, विमल पांडेय और विष्णु मौर्य की फिल्म ‘जय हो छठी माँ’ रिलीज होते ही हुआ वायरल
भोजपुरी सिनेमा की बेस्ट एक्ट्रेस का खिताब हासिल करने वाली टॉप मोस्ट पॉपुलर अदाकारा माही श्रीवास्तव सुपरहिट जोड़ी पॉपुलर सिंगर खुशी कक्कड़ के नया भोजपुरी लोकगीत ‘साड़ी झमकावे लगनी’ ऑडियंस के बीच लेकर आई हैं। यह गाना बहुत ही मधुर और कर्णप्रिय बनाया गया है। इस गाने में सिंगर खुशी कक्कड़ ने अपनी सुरीली आवाज का जादू चलाया है तो वहीं इस सांग के वीडियो में अदाकारा माही श्रीवास्तव ने अपने हुश्न और दिलकश अदा से सबको सम्मोहित कर रही हैं। इस गीत को देखकर लोगों का मानना है कि ये लोकगीत ‘साड़ी झमकावे लगनी’ भी काफी वायरल होने वाला है। यह वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स भोजपुरी म्यूजिक कंपनी के ऑफिसियल यूट्यूब चैनल पर रिलीज किया गया है। इस गाने का वीडियो सांग काफी अलग हटकर बनाया गया है। इसका फिल्मांकन देखते ही बन रहा है।
इस वीडियो सांग में दिख रहा है कि माही श्रीवास्तव
देसी लुक में क्रीम कलर की साड़ी और ब्लाउज पहने अट्रैक्टिव लुक में बहुत खूबसूरत दिख रही हैं। वह अपने शौक श्रृंगार का बखान करते हुए अपनी सहेलियों से कह रही है कि…
गोतिनि के देख देख भइल रहनी पागल, रोज बजावत रही पउवां में छागल, भईल जब राजा के नोकरिया त हमहुँ देखावे लगनी, चूड़ी चमकावे लगनी अ साड़ी झमकावे लगनी…’
वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स प्रस्तुत नया भोजपुरी लोकगीत ‘साड़ी झमकावे लगनी’ के निर्माता रत्नाकर कुमार हैं। इस गाने की सिंगर खुशी कक्कड़ हैं। इस गाने में एक्ट्रेस माही श्रीवास्तव ने शानदार अदायगी किया है। इस गीत को गीतकार गौतम राय (काला नाग) ने लिखा है, जबकि संगीतकार विकास यादव ने मधुर संगीत दिया है। वीडियो डायरेक्टर गोल्डी जायसवाल, डीओपी राजन वर्मा, कोरियोग्राफर सनी सोनकर, एडिटर आलोक गुप्ता हैं। डीआई रोहित सिंह ने किया है। इस गाने का ऑल राइट वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स के पास है।
इस गाने को लेकर माही श्रीवास्तव ने कहा कि छठ पूजा के बाद मेरा यह लोकगीत रिलीज हुआ है। इसे आप सब अपना भरपूर प्यार और आशीर्वाद दीजिए और हमेशा की तरह मुझे अपना फुल सपोर्ट करते रहिए। आगे भी मैं अच्छे से अच्छे लोकगीत आप सबके सामने पेश करती रहूंगी। इस गाने का बोल बहुत सरल है और इसका डांस स्टेप काफी मजेदार है, इसलिए इस गाने की शूटिंग के दौरान हमने खूब इंजॉय किया। इतना बढ़िया गाना बनाने के लिए रत्नाकर कुमार सर का दिल से आभार व्यक्त करती हूं। साथ ही इस गाने को पसंद करने के लिए सभी ऑडियंस को दिल से थैंक्यू।’

माही श्रीवास्तव और खुशी कक्कड़ का लोकगीत ‘साड़ी झमकावे लगनी’ वर्ल्डवाइड रिकॉर्ड्स ने किया रिलीज
Noida, October 2025 — The much-awaited 18th Global Film Festival Noida 2025 has been officially scheduled to take place from 11th to 13th December 2025 at Marwah Studios, Film City, Noida. The announcement was made by Dr. Sandeep Marwah, Chancellor of AAFT University and President of the Festival.
Over the past seventeen editions, the Global Film Festival Noida has grown into one of the most prestigious and vibrant international film festivals of India, celebrating the power of cinema as a tool for cultural exchange, artistic excellence, and global harmony.
Dr. Sandeep Marwah stated, “The Global Film Festival Noida has become a symbol of creativity and collaboration, bringing together filmmakers, artists, and media professionals from across the world. The 18th edition will continue our mission to promote world cinema and strengthen global unity through art and culture.”
The three-day festival will feature film screenings, workshops, seminars, masterclasses, panel discussions, cultural programs, and special award ceremonies. It will showcase a wide range of films from India and abroad, offering an exceptional platform for emerging talent and established filmmakers alike.
Organized by Marwah Studios in association with the International Chamber of Media and Entertainment Industry (ICMEI) and AAFT – Asian Academy of Film and Television, the Global Film Festival continues to promote India as a hub of media and entertainment excellence.


18th Global Film Festival Noida 2025 Announced For 10th To 12th December
चार दिवसीय छठ महापर्व के समापन के बाद बुधवार को सुबह राजधानी पटना के दीघा घाट से सफाई अभियान की शुरुआत की गई। सोमवार रात और मंगलवार तड़के लाखों श्रद्धालुओं ने सूर्य को अर्घ्य अर्पित कर छठ व्रत पूर्ण किया। छठ महापर्व पर गंगा घाट किनारे आस्था का सैलाब उमड़ता है और जाहिर सी बात है महापूजा के श्रद्धा भाव से मनाए जाने के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा पूजा सामग्री जल में या घाट के किनारे ही भूलवश छोड़ दी जाती है जाहिर सी बात है छोड़ दी गयी सामग्रियों से कुछ दिनों बाद बदबू व गंदगी फैल जाती है। जिससे निबटने के लिए अल्ट्राटेक सीमेंट व मीडिया मर्चेंट ने साझा व सराहनीय कदम उठाया व पटना के घाटों पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत कर दी है। पटना के दीघा घाट पर इस अभियान की सफल शुरुआत की गई है जो आगे भी जारी रहेगी। छठ महापर्व के अगले ही दिन बुधवार को सैकड़ो युवाओ के सहयोग के साथ टीमें घाटों की सफाई में जुट गईं।
सफाई टीम सुबह से ही घाटों पर पहुंचकर पूजा सामग्री, केले के पत्ते, दीपक और अन्य अवशेषों को एकत्रित कर रही थीं। मीडिया मर्चेंट के प्रतिनिधि ज्ञान रंजन ने बताया कि अपने सहयोगियों को पहले से ही सतर्क रखा गया था ताकि त्योहार के अगले ही दिन सफाई कार्य शुरू किया जा सके।
ज्ञान रंजन ने आगे कहा कि हम समय – समय पर ऐसे सामाजिक कार्यों का आयोजन करते रहते हैं। आज हमारे इस स्वच्छता अभियान में देश के नंबर 1 सीमेंट ब्रांड अल्ट्राटेक सीमेंट का हमें साथ मिला व उनके सहयोग एवं संयुक्त प्रयासों से हमने छठ घाटों की सफाई की। हमारा मानना है कि हमें अपनी नदियों और उनके किनारों को हमेशा स्वच्छ और सुन्दर रखना है। उन्होंने लोगों से भी अपील की कि पूजा या धार्मिक आयोजनों के बाद कचरे को गंगा में न डालें, बल्कि निर्धारित कूड़ेदानों में फेंकें। छठ घाटों की सफाई केवल एक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि यह हमारी सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान का प्रतीक है। स्वच्छता ही श्रद्धा का सबसे बड़ा रूप है और बिहारवासी इस अभियान में बढ़-चढ़कर हिस्सा लें।


अल्ट्राटेक व मीडिया मर्चेंट का सराहनीय पहल, पटना में छठ पूजा के बाद घाटों पर स्वच्छता अभियान की शुरुआत
~Marking a confident evolution from Fresh Ayurveda to Breathe Life, Nat Habit’s rebrand brings power, authority, and boldness to 100% natural beauty.~
Nat Habit, one of India’s most trusted and fastest-growing beauty and wellness brands rooted in Ayurveda, today announced a major brand transformation with the unveiling of its new identity and philosophy: “Breathe Life.” Evolving from its original positioning as ‘Fresh Ayurveda,’ the rebrand reflects Nat Habit’s transformation from a natural skincare pioneer to a powerful, purpose-led beauty movement.
With this strategic refresh, Nat Habit introduces a new logo, visual language, and packaging system that together embody the brand’s promise: “We don’t just make beauty more natural. We breathe life into your beauty.”
The rebrand goes beyond aesthetics; at its core lies a powerful philosophy: Breathe Life. It reflects Nat Habit’s belief that beauty should be nurturing yet potent, rooted in rituals, backed by science, and crafted to elevate everyday wellness. Key elements of the visual identity include:
“With Breathe Life, we are marking a confident evolution for Nat Habit from Fresh Ayurveda to a bolder, more purposeful expression of natural beauty. Our customers have always felt that Nat Habit is more than a beauty brand; it is a way of living rooted in wellbeing, vitality, and authenticity. This new identity brings that spirit to life, expressing the strength and confidence of modern Ayurveda while staying 100% natural at its core. Breathe Life reflects our belief that true beauty is about feeling alive, balanced, and deeply nurtured,” says Swagatika Das, CEO & Co-founder, Nat Habit.
To bring this refreshed identity to life and introduce Breathe Life to a wider audience, Nat Habit has partnered with acclaimed actor and wellness advocate Sahher Bambba, who unveiled the brand’s new look through a special video – https://youtube.com/shorts/zNZowxeiq1o
“Sahher isn’t just a familiar face; she perfectly embodies the spirit of Breathe Life and everything Nat Habit stands for. She represents the harmony of tradition and modernity, blending clarity with confidence, and grace with purpose. Her personal philosophy of beauty mirrors ours, making her the perfect face to usher in this new chapter. Through this collaboration, we aim to build deeper emotional resonance, and connect with a wider community seeking beauty that feels both modern and meaningful.” added Swagatika CEO & Co-founder of Nat Habit.
This evolution also stems from introspection. Since its inception, Nat Habit has championed fresh, preservative-free formulations inspired by and rooted in Ayurveda. But as the clean beauty space matured and consumer expectations evolved, a gap emerged between the brand’s quiet impact and how it was visually perceived.
Key shifts that shaped the rebrand:
The new brand identity will be rolled out across all digital platforms, packaging, quick commerce, and retail touchpoints starting this October. The launch will be supported by a multi-touchpoint campaign featuring creator-led collaborations and immersive consumer experiences designed to help audiences rediscover Nat Habit’s refreshed philosophy and design language in meaningful, engaging ways.
Nat Habit’s rebrand comes at a time of accelerated growth and readiness for scale. Inching close to ₹250 crore in revenue and a growing retail footprint of 10000+ stores, the refreshed identity positions the brand for deeper expansion, cultural resonance, newer categories, and broader cultural relevance in India and globally.

Nat Habit Unveils ‘Breathe Life’: A Bold New Identity Redefining The Power Of Natural Beauty
The lights dimmed at Pandit Deenanath Mangeshkar Sabhagruha, but silence came first — not the silence of emptiness, but the silence before prayer. Didi Aani Mee was not a concert; it felt like a return to a home built of notes and memory. It honoured Bharat Ratna Lata Mangeshkar and heralded the 89th birthday of Bhav Gandharva Pandit Hridaynath Mangeshkar — the younger brother who still speaks of her as an elder, a mentor, a divine force.
The Mangeshkar family — Hridaynath Mangeshkar, Bharati Mangeshkar, Usha Mangeshkar, Meena Mangeshkar, Adinath Mangeshkar — were present as guardians of an inheritance crafted by discipline, humility and sacred silences. Hon. Ashish Shelar, Dr. Anil Kakodkar, Swami Janmejayraje Vijaysinhraje Bhosale Maharaj of Akkalkot, Gautam Thakur, and artistes Roopkumar and Sonali Rathod were present — not merely as guests, but as witnesses to history breathing gently on stage.
When Hridaynath ji spoke, his words felt like a prayer whispered to his sister. “For us, Didi was the commander — the Senapati. We are only her soldiers. We simply follow the path she created. Her discipline, her dignity and her devotion to music still guide me every day.” The hall did not applaud; it absorbed.
Ashish Shelar shared stories the nation rarely heard — of Lata Didi speaking at Prabhu Kunj during photographer Mohan Bane’s book launch, describing cricket with such precision that even seasoned sportsmen were left astonished. And how, in this very auditorium, she once discussed ancient composers and India’s musical history with Hon. Home Minister Amit Shah — with such clarity that even time stood still to listen. “Her voice was immortal,” he said, “but so was her mind.”
Then came a moment of quiet grace. Swami Janmejayraje Vijaysinhraje Bhosale Maharaj, head of the royal house of Akkalkot, rose and said softly, “To be present here today is a blessing. To receive the affection and ashirwad of such an illustrious family like the Mangeshkars is my honour.” It was not a blessing offered — it was respect returned.
And then, legacy became commitment. In honour of Hridaynath Mangeshkar’s birthday, the Master Deenanath Mangeshkar Smruti Pratishthan made an announcement from the stage. They spoke of how the Trust was founded in 1988 by the Mangeshkar family to preserve the memory of Master Deenanath Mangeshkar and to organise his annual remembrance ceremony on 24 April — a tradition upheld continuously for 36 years. On that day, stalwarts from various fields are honoured, and music flows as prayer. The Trust has honoured over 225 personalities so far and supported many artists in need.
Since 2022, the Trust has also been bestowing the Lata Deenanath Mangeshkar Award to individuals who have made unparalleled contributions to India. The recipients so far — Hon. Prime Minister Narendra Modi, Asha Bhosle, Amitabh Bachchan and Kumar Mangalam Birla — reflect the magnitude of this honour.
Ravindra Joshi, Trustee of the Pratishtaan, further announced that every 28 September, Lata Didi’s birthday, a special musical programme is held in Pune, where young artists are blessed by Pandit Hridaynath Mangeshkar. The programme has become a tradition — complete with music, memories, and a meal prepared with Lata Didi’s favourite dishes. To ensure that this legacy continues forever, the Trust declared the creation of a separate permanent fund. All income generated from this fund will be dedicated exclusively to organising this annual programme. A committee — Hridaynath Mangeshkar, Bharati Mangeshkar, Usha Mangeshkar, Adinath Mangeshkar, Swami Janmejayraje Vijaysinhraje Bhosale Maharaj, Ravindra Joshi, Shirish Rairikar, and Nischal Latad will oversee it. And as the first offering, Hridaynath Mangeshkar himself announced a contribution of ₹25 lakh. Contributions from well-wishers were welcomed with grace. The Trust remains a registered public charitable institution in Pune, eligible for income tax exemptions on donations.
The evening ended not with applause, but with folded hands, moist eyes and quiet reverence. Because some lives do not end — they become the air left behind after music stops.
Hridaynath Mangeshkar Honours Legacy Of Love & Reverence On Entering His Glorious 89th Year With Didi Aani Mee
मुंबई के पंडित दीनानाथ मंगेशकर सभागृह में जब रोशनी धीमी हुई, तो सबसे पहले शांति उतरी — वह शांति जो आरती से पहले होती है, स्मरण से पहले होती है। ‘दिदी आनी मी’ सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि यह स्वर और स्मृति से सजे हुए उस घर की वापसी थी, जिसका नाम है — लता मंगेशकर। इसी भावनाओं से भरे वातावरण में पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने अपने जीवन के 89वें वर्ष में प्रवेश किया — वही ह्रदयनाथ जी, जो आज भी अपनी बहन को आदर से “दिदी” कहकर याद करते हैं।
मंच पर मंगेशकर परिवार की उपस्थिति स्वयं विरासत की प्रतीक थी — पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर, भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, मीना मंगेशकर और आदिनाथ मंगेशकर। इनके साथ माननीय अशिष शेलार, प्रतिष्ठित वैज्ञानिक डॉ. अनिल काकोडकर, अक्कलकोट राजघराने के स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज, सारस्वत बैंक के सीएमडी गौतम ठाकुर तथा कलाकार रूपकुमार और सोनाली राठौड़ भी इस संध्या के साक्षी बने।
जब पंडित ह्रदयनाथ जी ने मंच संभाला, तो उनके शब्द प्रार्थना की तरह लगे। उन्होंने कहा — “हम सबके लिए दिदी सेनापति थीं। हम तो बस उनके सैनिक हैं। उन्होंने जो राह दिखाई, हम केवल उसी पर चल रहे हैं। उनकी अनुशासन, उनकी मर्यादा और संगीत के प्रति उनका समर्पण आज भी मेरा मार्गदर्शन करता है।” पूरा सभागार उनकी भावनाओं के साथ स्थिर हो गया।
माननीय अशिष शेलार ने लता दीदी की बुद्धिमत्ता और गहराई को याद करते हुए बताया कि प्रभुकुंज में फोटोग्राफर मोहन बाणे की पुस्तक के विमोचन के समय उन्होंने क्रिकेट पर ऐसी सटीक समझ के साथ बात की कि सब दंग रह गए। और कैसे इसी सभागार में उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह के साथ संगीतकारों और भारतीय संगीत इतिहास पर ऐसा गहन संवाद किया कि समय भी ठहरता-सा लगने लगा। उन्होंने कहा — “उनकी आवाज़ अमर थी, लेकिन उनका मस्तिष्क भी उतना ही अद्वितीय था।”
इसी दौरान अक्कलकोट के स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज ने विनम्रता से कहा —“आज यहां उपस्थित होना मेरे लिए आशीर्वाद के समान है। मंगेशकर जैसे महान परिवार का स्नेह और आशीर्वाद प्राप्त करना मेरे लिए सम्मान है।”उनके यह शब्द आशीर्वाद नहीं, विनम्रता से झुका हुआ मस्तक थे।
इसके बाद स्मृति से संकल्प की ओर बढ़ते हुए मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृति प्रतिष्ठान ने घोषणा की। बताया गया कि यह ट्रस्ट वर्ष 1988 में मंगेशकर परिवार द्वारा स्थापित किया गया था, जिसका उद्देश्य हर वर्ष 24 अप्रैल को मास्टर दीनानाथ जी की पुण्यतिथि पर स्मृति समारोह आयोजित करना है। पिछले 36 वर्षों से यह परंपरा बिना रुके निभाई जा रही है, और अब तक 225 से अधिक विभूतियों को सम्मानित किया जा चुका है।
सन् 2022 से इस प्रतिष्ठान द्वारा ‘लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार’ भी प्रदान किया जा रहा है — जिसके अब तक के प्राप्तकर्ता हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आशा भोसले, अमिताभ बच्चन और कुमाfर मंगलम बिड़ला।
ट्रस्टी रविंद्र जोशी ने घोषणा की कि हर वर्ष 28 सितंबर — लता दीदी का जन्मदिन — पुणे में आयोजित होने वाले इस विशेष संगीत समारोह को सदैव जारी रखने के लिए एक स्थायी निधि (Corpus Fund) बनाई जा रही है। इस निधि से होने वाली आय केवल इस वार्षिक स्मृति कार्यक्रम के लिए उपयोग की जाएगी। इस समिति में पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर, भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, आदिनाथ मंगेशकर, स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज, रविंद्र जोशी,a dm शिरीष रैरीकर और निष्कल लताड़ शामिल रहेंगे। इस निधि के प्रारंभ हेतु पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने स्वयं ₹25 लाख का योगदान घोषित किया।
यह प्रतिष्ठान पुणे के चैरिटी कमिश्नर कार्यालय में पंजीकृत है तथा आयकर विभाग द्वारा अनुमोदित है, जिससे दी गई दानराशि पर आयकर में छूट का लाभ मिलता है।
संध्या का समापन तालियों से नहीं, बल्कि भीगी आंखों, जुड़ी हथेलियों और मौन श्रद्धा से हुआ। कुछ आवाज़ें समाप्त नहीं होतीं — वे हवा बनकर हमारे साथ रहती हैं, संगीत रुकने के बाद भी ।
दिदी आनी मी – संगीत, स्मृति और सम्मान की मधुर संध्या, जहां पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर ने अपने 89वें वर्ष की शुरुआत पर भारत रत्न लता मंगेशकर के प्रति प्रेम और कृतज्ञता को प्रणाम किया
पंडित दीनानाथ मंगेशकर सभागृहात दिवे मंदावले आणि पहिल्यांदा शांतता उतरली — रिकामेपणाची नाही, तर प्रार्थनेपूर्वीची. ‘दिदी आणी मी’ हा केवळ एक कार्यक्रम नव्हता; तो सुरांच्या घरात पुन्हा परतण्याचा क्षण होता. हा सोहळा भारतरत्न लता मंगेशकर यांना समर्पित होता आणि त्याच वेळी भाऊगंधर्व पंडित ह्रदयनाथ मंगेशकर यांच्या ८९ व्या वर्षाच्या प्रारंभाचा साक्षीदारदेखील होता — तेच ह्रदयनाथजी, जे आजही त्यांना ‘दिदी’ म्हणूनच स्मरतात — मार्गदर्शक, प्रेरणास्रोत, आणि कृपेचे अधिष्ठान.
ह्रदयनाथ मंगेशकर, भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, मीनाताई मंगेशकर, आदिनाथ मंगेशकर — हे सर्व परिवारातील ज्येष्ठ आणि वारशाचे संरक्षक उपस्थित होते. या क्षणाचे साक्षीदार होते — मा. अशिष शेलार, डॉ. अनिल काकोडकर, अक्कलकोट संस्थानचे महाराज श्री स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले, गौतम ठाकूर, रूपकुमार आणि सोनाली राठोड — पाहुणे म्हणून नव्हे, तर इतिहासाला साक्ष देणारे साक्षीदार म्हणून.
जेव्हा ह्रदयनाथजी बोलायला उठले, त्यांचे शब्द बहिणीला वाहिलेल्या शांत प्रार्थनेसारखे वाटले. त्यांनी सांगितले — “आमच्यासाठी दिदी म्हणजे सेनापती. आम्ही फक्त त्यांचे सैनिक. त्यांनी दाखवलेला मार्गच आम्ही चालत आलो आहोत. त्यांची शिस्त, त्यांची मर्यादा, संगीताशी त्यांचं निष्ठावान नातं — हेच अजूनही आम्हाला मार्ग दाखवतं.” सभागृह थबकलं — टाळ्यांसाठी नव्हे, तर भावनांना मोकळं होण्यासाठी.
यानंतर मा. अशिष शेलार यांनी लतादीदींच्या अलभ्य आठवणी उलगडल्या. प्रभुकुंज येथे छायाचित्रकार मोहन बाणे यांच्या पुस्तक प्रकाशनावेळी लतादीदींनी क्रिकेटचे असे तपशीलवार विश्लेषण केले, की अनुभवी क्रीडापटूही थक्क झाले. आणि याच सभागृहात, एकदा त्यांनी मा. गृहमंत्री अमित शहांसोबत भारतीय संगीताच्या इतिहासावर केलेले सखोल चिंतन — असा शेलारजींनी उल्लेख करत म्हटलं — “त्यांचा आवाज अमर होता, पण त्यांची बुद्धीही तितकीच अद्वितीय होती.”
यानंतर सभागृहात एक राजेशाही शांतता उतरली. अक्कलकोट संस्थानचे स्वामी जंजमेयराजे विजयसिंहराजे भोसले महाराज अत्यंत नम्रतेने उभे राहिले आणि म्हणाले —“इथे उपस्थित राहणे ही माझ्यासाठी आशीर्वादासारखी अनुभूती आहे. मंगेशकरांसारख्या दिग्गज कुटुंबाकडून स्नेह आणि आशीर्वाद मिळणे — हाच माझा सन्मान आहे.”हे आशीर्वाद नव्हते — हे कृतज्ञतेने झुकलेलं मानवी नम्रतेचं सौंदर्य होतं.
आणि मग वारसा झाला संकल्प.मास्टर दीनानाथ मंगेशकर स्मृती प्रतिष्ठानतर्फे जाहीर करण्यात आले की — सन १९८८ मध्ये स्थापन झालेल्या या विश्वस्त संस्थेने गेली ३६ वर्षे दि. २४ एप्रिल रोजी मास्टर दीनानाथजींच्या पुण्यतिथीचे स्मरण अत्यंत निष्ठेने साजरे केले आहे. आतापर्यंत २२५ हून अधिक मान्यवरांचा सन्मान झाला आहे आणि अनेक कलावंतांना मदतही करण्यात आली आहे.
सन २०२२ पासून ‘लता दीनानाथ मंगेशकर पुरस्कार’ही प्रदान केला जात आहे. पंतप्रधान नरेंद्र मोदी, आशा भोसले, अमिताभ बच्चन आणि कुमार मंगलम बिर्ला हे आजवरचे मानकरी.
रविंद्र जोशी यांनी पुढे सांगितले — की दरवर्षी २८ सप्टेंबरला, पुण्यात लतादीदींच्या जन्मदिनानिमित्त आयोजित होणारा संगीताचा सोहळा अखंडितपणे सुरू राहावा म्हणून एक संकल्पनिधी / कायमस्वरूपी निधी उभारण्यात येत आहे. या निधीवरील व्याजातून या सोहळ्याचे सर्व खर्च उचलले जातील. ह्रदयनाथजींनी स्वतः रु.२५ लाखांची देणगी प्रथम नोंदवली. भारती मंगेशकर, उषा मंगेशकर, ह्रदयनाथ मंगेशकर, आदिनाथ मंगेशकर, स्वामी जंजमेयराजे भोसले, रविंद्र जोशी, शिरीष रैरीकर आणि निष्कळ लटाड या समिती सदस्यांच्या देखरेखीखाली हा उपक्रम पार पडेल.
कार्यक्रमाचा शेवट टाळ्यांनी झाला नाही — तर ओलावलेल्या डोळ्यांनी, जपून धरलेल्या शांततेने आणि दुमदुमणाऱ्या भावनेने. काही आवाज थांबत नाहीत. ते विरून जात नाहीत. ते हवेचा श्वास होतात — आणि संगीत थांबल्यानंतरही जगत राहतात.
‘दिदी आणी मी’ — संगीत, स्मृती आणि स्नेहाचा सोहळा, पं. ह्रदयनाथ मंगेशकर यांनी भारतरत्न लता दीदींच्या प्रेम व परंपरेला दिलेली कृतज्ञ अभिवादनाअंतर्गत त्यांच्या ८९ व्या वर्षात प्रवेशाचा भावपूर्ण उत्सव
Actress Karnika Mandal steps into the spotlight as the lead actress of ‘YANA…?, undertaking what the production team describes as a “surprising and challenging role.” Her character reportedly draws from historical figures of the 1840s period, requiring extensive preparation and emotional range.
Karnika Mandal says ” after hearing the narration I am sure this is the my dream film for which I had been waiting for in my film career.”
“Karnika Mandal brings exceptional depth to her portrayal in this biopic,” notes a production insider. “The role demands both physical transformation and psychological immersion into a character from a vastly different era.”
The actress has been spotted at various historical locations during pre-production, studying artifacts and historical documents to better understand the societal context of women in 1840s India. Her dedication to historical accuracy demonstrates the film’s commitment to authentic storytelling despite its genre-bending musical elements.
Under the direction of Mr. Prajapati, ‘YAANA…? takes shape as a multilingual production that will be simultaneously released in Hindi, Telugu, Tamil, Kannada, and Malayalam. This ambitious approach reflects the pan-Indian significance of the historical events portrayed in the film, as well as the production team’s commitment to reaching diverse linguistic audiences across the subcontinent.
The multilingual production strategy involves not merely dubbing the film but adapting cultural and linguistic nuances for each regional version, ensuring authentic resonance with varied audiences. Prajapati’s directorial vision encompasses this complexity while maintaining narrative cohesion across all language versions.
Supporting Mr. Prajapati’s creative vision is a team of accomplished professionals, The film’s screenplay and dialogs have been crafted by Pinku Dube and Sonu Dandoria This collaborative approach to storytelling ensures that the historical narrative maintains both factual integrity and dramatic impact.
Composer Dev Chauhan has been tasked with creating a musical landscape that bridges nearly two centuries of musical evolution. His soundtrack for ‘YAANA…? will include traditional compositions authentic to the 1840s setting while also featuring contemporary elements—most notably an English-language song positioned to achieve international appeal.
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Actress Karnika Mandal to share screen in Epic Period historical movie ‘‘YANA…? with and Rahul B Kumar