पुणे की कानून की गलियों से लेकर बॉलीवुड, उर्दू शायरी और सेलिब्रिटी एंकरिंग की चमकती दुनिया तक—प्रतिभा, सफलता और सम्मान की एक बेमिसाल दास्तान । कुछ शख़्सियतें कमरे में प्रवेश करती हैं… कुछ मंच पर आते ही माहौल बदल देती हैं… और फिर कुछ ऐसी नायाब हस्तियाँ होती हैं, जिनके शब्द ही एक पूरा संसार रच देते हैं। डॉ. वैभव “नायाब” शर्मा ऐसी ही एक विलक्षण शख़्सियत हैं। 40 राष्ट्रीय और 6 अंतरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित, अंतरराष्ट्रीय सेलिब्रिटी एंकर, प्रख्यात उर्दू शायर और प्रभावशाली वक्ता डॉ. वैभव शर्मा ने कानून, साहित्य, शायरी, मनोरंजन और मंच संचालन की दुनिया में अपनी एक अलग और शानदार पहचान बनाई है। उनकी यात्रा केवल उपलब्धियों की कहानी नहीं, बल्कि प्रतिभा, आत्मविश्वास, रचनात्मकता और शब्दों की अद्भुत शक्ति का शानदार उत्सव है। प्रतिष्ठित सिम्बायोसिस लॉ कॉलेज, पुणे से B.S.L. Law Honours की डिग्री हासिल करने वाले डॉ. शर्मा के भीतर छिपे कलाकार ने उनके छात्र जीवन में ही अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी थी। भारत के प्रतिष्ठित युवा महोत्सव IIT मुंबई के MOOD INDIGO FESTIVAL में उन्होंने हिंदी एक्सटेम्पोर और क्रिएटिव राइटिंग—दोनों में प्रथम पुरस्कार प्राप्त कर अपनी असाधारण प्रतिभा का परिचय दिया। मंच उनके व्यक्तित्व का स्वाभाविक विस्तार बन गया। वर्ष 2004 में उन्हें महान ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह जी के कार्यक्रम की एंकरिंग एवं मंच संचालन प्रस्तुति देने का गौरव प्राप्त हुआ। यह उनके जीवन का ऐसा यादगार अध्याय था, जिसने उनकी प्रतिभा को भारतीय संगीत की एक महान विभूति से जोड़ दिया। उर्दू शायरी के क्षेत्र में भी डॉ. शर्मा ने अपनी सशक्त पहचान बनाई। वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ उर्दू में आयोजित महफ़िल-ए-कायनात में उन्होंने बेस्ट उर्दू शायर अवॉर्ड हासिल किया। यह सम्मान उन्हें डायलॉग किंग कादर खान, मशहूर उर्दू शायर डॉ. बशीर बद्र और सुप्रसिद्ध शायर निदा फ़ाज़ली जैसी महान हस्तियों की उपस्थिति में प्राप्त हुआ। किसी शायर के लिए इससे बड़ा सम्मान और क्या हो सकता है कि उसकी भाषा और शायरी को स्वयं दिग्गज कलाकार पहचान दें। भारत रत्न माँ सरस्वती लता मंगेशकर जी, महान हिंदी कवि डॉ. गोपालदास नीरज जी और ग़ज़ल सम्राट जगजीत सिंह जी और टॉम अल्टर ने उनकी भाषा और अभिव्यक्ति की विलक्षण क्षमता की सराहना की। वहीं सब ने वैभव जी को गौरवपूर्ण उपाधि दी—“ज़ुबान के बादशाह।” । वर्ल्ड कॉन्फ्रेंस ऑफ उर्दू में उनकी मंत्रमुग्ध कर देने वाली और रूह को छू लेने वाली उर्दू शायरी सुनकर मक्का-मदीना के मौलवी साहब ने उन्हें “नायाब” की उपाधि दी—अर्थात् ऐसा व्यक्तित्व जो दुर्लभ, अनमोल और बेमिसाल हो। और जब कादर खान जी जैसी महान शख़्सियत किसी को “रूहानी फ़रिश्ता” कहकर संबोधित करे, तो वह उपाधि स्वयं एक सम्मान बन जाती है। यह नाम डॉ. शर्मा की यात्रा में एक और अनमोल अध्याय बन गया। 18 जुलाई 2021 को मुंबई में उनके सम्मान का एक और स्वर्णिम अध्याय जुड़ा, जब उन्हें American University of Global Peace, U.S.A. द्वारा Doctorate of Honour से सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण अवसर पर उनके साथ महान पार्श्वगायक पद्मभूषण उदित नारायण जी और सुप्रसिद्ध दिग्गज अभिनेता रज़ा मुराद जी भी सम्मानित हुए। डॉ. वैभव “नायाब” शर्मा केवल पुरस्कारों से सम्मानित व्यक्तित्व नहीं हैं। वे अभिव्यक्ति के कलाकार, भावनाओं के प्रस्तोता और भाषा के सच्चे साधक हैं। उनकी यात्रा यह सिद्ध करती है कि जब ज्ञान का मिलन रचनात्मकता से और प्रतिभा का मिलन समर्पण से होता है, तो सफलता स्वयं रास्ता तलाश लेती है। एक नायाब शख़्सियत… एक बेमिसाल सफ़र… और एक ऐसी विरासत, जो केवल कागज़ पर नहीं, बल्कि सुनने वालों के दिलों में लिखी जाती है। डॉ. वैभव “नायाब” शर्मा ।“ज़ुबान के बादशाह • रूहानी फ़रिश्ता • शब्दों को जादू में बदल देने वाली शख़्सियत”। Post navigation राहुल देशपांडे की ‘अभंगवारी’ ने शन्मुखानंद हॉल को भक्तिरस से सराबोर किया